Bihar Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana: केंद्र सरकार की तरह बिहार सरकार भी महिलाओं को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के लिए नई-नई योजनाएं लेकर आ रही है! जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखपति दीदी योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का सपना दिखाया!
उसी तरह बिहार में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू की है! हाल ही में इस योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है और अब इसकी गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है!
Bihar Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा! कि राज्य के हर महिला जो स्वरोजगार शुरू करना चाहती है! उसे शुरुआत में ही ₹10,000 की मदद मिलेगी! ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके!
लेकिन इसके लिए एक शर्त रखी गई है कि महिला को जीविका दीदी स्वयं सहायता समूह यानी SHG से जुड़ना होगा! तभी उसे यह लाभ मिल पाएगा। सरकार ने कहा है कि यह मदद किसी भी परिवार से सिर्फ एक महिला को ही दी जाएगी!
Mahila Rojgar Yojana Benefits
यह खास बात यह है कि योजना यहीं तक सीमित नहीं है! बल्कि अगर महिला का कारोबार 6 महीने तक अच्छा चलता है! तो उसे आगे बढ़ने के लिए किस्तों में और आर्थिक मदद दी जाएगी!
शुरुआत के बाद अगला कदम होगा ₹15,000 का लोन, फिर ₹75,000 का और सबसे बड़ी मदद होगी ₹2 लाख तक का लोन! जिससे महिलाएं अपना कारोबार और बड़ा कर सकती हैं! सरकार ने ब्याज दर भी तय कर दी है! 12% सालाना जिसे एक से 3 साल की अवधि में चुकाना होगा! ताकि महिलाओं पर बोझ ना पड़े!
उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ किया है! कि इस योजना से राज्य के 2.7 करोड़ परिवारों की महिलाएं जुड़ेंगी! और इससे ना सिर्फ महिलाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी! यह कदम चुनाव से ठीक पहले महिलाओं को लुभाने के लिए नीतीश कुमार का बड़ा दांव माना जा रहा है!
नीतीश कुमार पहले भी शराबबंदी, महिला आरक्षण और शिक्षक बहाली जैसे फैसलों से महिला वोटर्स को अपनी ओर खींच चुके हैं! इस बार भी उनकी कोशिश वही नजर आ रही है!
हर महिला को Nitish सरकार देगी 10 हजार रुपये
योजना को लागू करने की जिम्मेदारी बिहार ग्रामीण जीवी कोपारजन प्रोत्साहन समिति यानी बीआरएलपीएस को दी गई है! जिसे 2006 में विश्व बैंक की मदद से शुरू किया गया था! इस संस्था ने महिलाओं को छोटे-छोटे कामों से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया है! अभी राज्य में करीब 10.81 लाख स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं! जिनसे 1.34 करोड़ महिलाएं जुड़ी हुई हैं!
और यह महिलाएं कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प, किराना दुकान, सिलाई, कढ़ाई और छोटे-छोटे उद्योगों के जरिए ना सिर्फ अपने घर का खर्च चला रही हैं! बल्कि परिवार की आर्थिक हालत भी सुधार रही हैं! हाल ही में बीआरएलपीएस के तहत जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड बनाया गया!
जो महिलाओं को बैंक की तरह ही कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराता है! ताकि उन्हें प्राइवेट साहूकारों के चंगुल में ना फंसना पड़े! कुल मिलाकर कहा जाए! तो बिहार सरकार की योजना महिलाओं को आर्थिक ताकत देने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया सहारा देने के लिए लाई गई है और इसका असर सीधे तौर पर चुनाव में भी देखने को मिल सकता है!